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उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: इंडिया गठबंधन का मास्टर स्ट्रोक, बीजेपी की रणनीति को तगड़ा झटका!

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विवरण: उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 में इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी को चौंका दिया। एनडीए के सीपी राधाकृष्णन के खिलाफ यह दक्षिण भारत से दक्षिण भारत की जंग है। क्या इंडिया का यह दांव नायडू और नीतीश जैसे सहयोगियों को बीजेपी से दूर ले जाएगा? जानिए गुप्त मतदान और क्रॉस वोटिंग की संभावनाएं!

नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की जंग अब और रोमांचक हो गई है। एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु के दिग्गज बीजेपी नेता सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया, तो इंडिया गठबंधन ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा। यह दक्षिण भारत के दो दिग्गजों की टक्कर है, जिसमें राजनीतिक रणनीति, गठबंधन की एकता और गुप्त मतदान की भूमिका अहम होगी।

बीजेपी की रणनीति और इंडिया का जवाबी दांव


बीजेपी को उम्मीद थी कि सीपी राधाकृष्णन के नाम पर विपक्ष समर्थन दे देगा, क्योंकि एनडीए के पास 422 सांसदों का समर्थन है, जो बहुमत (392 वोट) से कहीं अधिक है। बीजेपी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को विपक्षी नेताओं, खासकर कांग्रेस से बातचीत के लिए लगाया, ताकि राधाकृष्णन का निर्विरोध चुनाव सुनिश्चित हो। लेकिन इंडिया गठबंधन ने न केवल उम्मीदवार उतारा, बल्कि आंध्र प्रदेश के बी. सुदर्शन रेड्डी को चुनकर बीजेपी की रणनीति को झटका दिया। रेड्डी की गैर-राजनीतिक और संवैधानिक छवि, साथ ही तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से उनका जुड़ाव, एनडीए के सहयोगी दलों, खासकर टीडीपी और जेडीयू, को असमंजस में डाल सकता है।

क्यों है इंडिया का यह मास्टर स्ट्रोक?


इंडिया गठबंधन का यह कदम केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है। बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर विपक्ष ने एनडीए के गैर-बीजेपी दलों, जैसे टीडीपी (चंद्रबाबू नायडू) और जेडीयू (नीतीश कुमार), को बीजेपी के साथ अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करने का मौका दिया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू, जिनके समर्थन से केंद्र में मोदी सरकार चल रही है, के लिए यह क्षेत्रीय गर्व और स्थानीय भावनाओं का सवाल है। रेड्डी का तेलंगाना कनेक्शन और उनकी सामाजिक न्याय की छवि टीडीपी और बीआरएस जैसे दलों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, गुप्त मतदान की प्रक्रिया क्रॉस वोटिंग की संभावना को बढ़ाती है, क्योंकि व्हिप लागू नहीं होता।

चुनावी गणित और गुप्त मतदान की भूमिका


उपराष्ट्रपति का चुनाव 9 सितंबर 2025 को होगा, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के 782 सांसद वोट डालेंगे। जीत के लिए 392 वोट चाहिए। एनडीए के पास 422 सांसदों का समर्थन है, जबकि इंडिया गठबंधन के पास 355 सांसद हैं। 50-60 गैर-गठबंधन सांसद, जैसे वाईएसआरसीपी और बीजेडी, निर्णायक हो सकते हैं। गुप्त मतदान के कारण क्रॉस वोटिंग की संभावना से बीजेपी को अपने सहयोगियों को एकजुट रखने की चुनौती मिल रही है।

क्या है उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया?


उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए होता है। यह आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति पर आधारित है, जिसमें एकल हस्तांतरणीय मत (सिंगल ट्रांसफरेबल वोट) का उपयोग होता है। मतदाता अपने मतपत्र पर उम्मीदवारों को वरीयता क्रम (1, 2, 3…) में चिह्नित करते हैं। यदि पहली गिनती में कोई उम्मीदवार बहुमत नहीं पाता, तो सबसे कम वोट वाले उम्मीदवार को हटाकर उनके वोट दूसरी वरीयता के आधार पर बांटे जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक कोई उम्मीदवार बहुमत हासिल नहीं कर लेता। मतदान गुप्त होता है, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

कौन हैं बी. सुदर्शन रेड्डी?


बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म 1946 में आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले में एक किसान परिवार में हुआ। उन्होंने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की और 1971 में वकालत शुरू की। 1995 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज बने, 2005 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और 2007-2011 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे। 2013 में वे गोवा के पहले लोकायुक्त बने। उनकी संवैधानिक छवि और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें विपक्ष का मजबूत चेहरा बनाती है।

कौन हैं सीपी राधाकृष्णन?


सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु के कोयंबटूर से दो बार सांसद रह चुके हैं और बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं। 17 साल की उम्र से आरएसएस और भारतीय जनसंघ से जुड़े, वे तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष, झारखंड, तेलंगाना और पुडुचेरी के राज्यपाल रह चुके हैं। 2024 में महाराष्ट्र के राज्यपाल बने। बीजेपी ने उन्हें दक्षिण भारत में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए चुना, खासकर 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए।

क्या होगा नतीजा?


हालांकि संख्याबल में एनडीए की स्थिति मजबूत है, लेकिन इंडिया गठबंधन का यह दांव बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। गुप्त मतदान और क्षेत्रीय भावनाएं, खासकर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में, क्रॉस वोटिंग को बढ़ावा दे सकती हैं। यह चुनाव न केवल उपराष्ट्रपति पद के लिए है, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए भी राजनीतिक समीकरण तय करेगा। 9 सितंबर को होने वाला यह चुनाव भारतीय राजनीति की दिशा को प्रभावित करने वाला साबित हो सकता है।

आपकी राय


क्या इंडिया गठबंधन का यह मास्टर स्ट्रोक बीजेपी को दबाव में लाएगा? क्या क्रॉस वोटिंग से नतीजे बदल सकते हैं? अपनी राय कमेंट में बताएं!

Shekhar
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