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UP Teacher Student Online Attendance -प्रदेश में शिक्षकों और छात्रों की ऑनलाइन हाजिरी पर बड़ा विवाद! क्या वापस होगा आदेश?

Teacher Student Online Attendance- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के ऑनलाइन उपस्थिति आदेश ने शिक्षकों और छात्रों में हलचल मचा दी है। शिक्षक संगठन ने इसे अव्यवहारिक और अनधिकृत बताकर वापस लेने की मांग की है। क्या है पूरा मामला? जानें ताजा अपडेट और शिक्षकों की चिंताएं!

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लेख:

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) ने 18 जुलाई 2025 को माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव को एक ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों और छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के आदेश को वापस लेने की मांग की है। यह आदेश, जो 30 जून 2025 को जारी किया गया था, प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति को UPMSP पोर्टल पर प्रतिदिन ऑनलाइन दर्ज करने का निर्देश देता है। लेकिन शिक्षक संगठन ने इसे गैरजरूरी, अव्यवहारिक, और अनधिकृत करार दिया है।

ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:

  1. पोर्टल की गोपनीयता पर खतरा: UPMSP पोर्टल पर स्कूलों का एक ही यूजर आईडी और पासवर्ड होता है, जो प्रधानाचार्य के पास सुरक्षित रहता है। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए अन्य शिक्षकों को यह पासवर्ड देना पड़ सकता है, जिससे गोपनीय डेटा की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। साथ ही, एक ही लिंक पर शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने से हस्तक्षेप या गड़बड़ी की आशंका है।
  2. तकनीकी और संसाधन की कमी: ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट की अनियमित आपूर्ति के कारण यह व्यवस्था अव्यवहारिक है। अधिकांश स्कूलों में आवश्यक उपकरणों का अभाव है। पहले भी प्राथमिक स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण इसे वापस लेना पड़ा था।
  3. शिक्षकों पर अविश्वास: संगठन का कहना है कि यह आदेश शिक्षकों को संदिग्ध और अविश्वसनीय दिखाने की कोशिश है। परिषद के मुख्यालय और अन्य सरकारी कार्यालयों में ऐसी व्यवस्था लागू नहीं की गई है। शिक्षक संगठन ने ई-फाइलिंग जैसे पारदर्शी उपायों को लागू न करने पर भी सवाल उठाए हैं।
  4. समय और श्रम की बर्बादी: वर्तमान में उपस्थिति पंजिका और बायोमेट्रिक के माध्यम से उपस्थिति दर्ज हो रही है। ऑनलाइन उपस्थिति तीसरा माध्यम होगा, जो अकादमिक कार्यों के लिए समय की बर्बादी करेगा।
  5. अनधिकृत आदेश: शिक्षक संगठन ने दावा किया कि यह आदेश इंटर शिक्षा अधिनियम 1921 के नियमों के खिलाफ है, और इसे बिना किसी शासकीय संकल्प के सचिव द्वारा स्वत: जारी किया गया है।

आगे की रणनीति: संगठन ने मांग की है कि आदेश को तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा 27 जुलाई 2025 को होने वाली प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में अगला कदम तय किया जाएगा।

विवाद की पृष्ठभूमि: हाल ही में, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों की नाराजगी साफ दिख रही है। कई शिक्षकों ने इसे मानसिक दबाव और समय की बर्बादी बताया है। कुछ ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी और तकनीकी समस्याएं इस व्यवस्था को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा हैं।

शिक्षा विभाग का रुख: अभी तक परिषद या सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, पहले के अनुभवों को देखते हुए, जब प्राथमिक स्कूलों में इसी तरह की व्यवस्था को भारी विरोध के बाद वापस लिया गया था, यह देखना होगा कि क्या सरकार इस बार भी शिक्षकों की मांगों पर विचार करेगी।

ऑनलाइन उपस्थिति आदेश के प्रमुख बिंदु और शिक्षक संगठन की आपत्तियां

बिंदुआदेश का विवरणशिक्षक संगठन की आपत्ति
पोर्टल उपयोगसभी स्कूलों को UPMSP पोर्टल पर शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति दर्ज करनी होगी।एक ही यूजर आईडी और पासवर्ड से गोपनीयता खतरे में; हस्तक्षेप की आशंका।
तकनीकी संसाधनप्रतिदिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए इंटरनेट और उपकरणों की आवश्यकता।ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट की कमी; उपकरणों का अभाव।
शिक्षकों पर प्रभावशिक्षकों को संदिग्ध दिखाने की कोशिश।अन्य सरकारी कार्यालयों में ऐसी व्यवस्था नहीं; शिक्षकों की निष्ठा पर सवाल।
समय और श्रमप्रतिदिन हजारों छात्रों की उपस्थिति दर्ज करना।अकादमिक कार्यों में समय की बर्बादी; पहले से ही पंजिका और बायोमेट्रिक मौजूद।
कानूनी आधारआदेश 30 जून 2025 को जारी।इंटर शिक्षा अधिनियम 1921 के खिलाफ; बिना शासकीय संकल्प के अनधिकृत।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

1. ऑनलाइन उपस्थिति आदेश क्या है?
उत्तर: यह उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद का 30 जून 2025 का आदेश है, जिसके तहत सभी माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति UPMSP पोर्टल पर प्रतिदिन ऑनलाइन दर्ज करनी होगी।

2. शिक्षक संगठन इस आदेश का विरोध क्यों कर रहा है?
उत्तर: संगठन का कहना है कि यह आदेश अव्यवहारिक, अनधिकृत, और समय की बर्बादी करने वाला है। यह शिक्षकों की गोपनीयता और निष्ठा पर सवाल उठाता है, और ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी संसाधनों की कमी इसे लागू करना मुश्किल बनाती है।

3. क्या पहले भी ऐसी व्यवस्था लागू की गई थी?
उत्तर: हां, प्राथमिक स्कूलों में पिछले साल ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं और विरोध के कारण इसे वापस लेना पड़ा था।

4. क्या होगा अगर आदेश वापस नहीं लिया गया?
उत्तर: शिक्षक संगठन ने चेतावनी दी है कि 27 जुलाई 2025 को होने वाली बैठक में अगला कदम तय किया जाएगा, जिसमें बड़े आंदोलन की संभावना है।

5. क्या सरकार इस आदेश पर पुनर्विचार कर सकती है?
उत्तर: अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पहले के अनुभवों को देखते हुए, भारी विरोध के बाद सरकार इस पर विचार कर सकती है।

निष्कर्ष: यह विवाद उत्तर प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। शिक्षकों की मांग और सरकार के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं। क्या यह आदेश वापस होगा, या शिक्षकों को इसे मानना पड़ेगा? आने वाले दिन इसकी दिशा तय करेंगे।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक जानकारी और उपलब्ध स्रोतों के आधार पर लिखा गया है। इसमें व्यक्त विचार लेखक के हैं और किसी भी पक्ष को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं है। कॉपीराइट-मुक्त सामग्री का उपयोग किया गया है।

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