UP BASIC SHIKSHA NEWS -नमस्ते, मैं हूं अभिषेक उपाध्याय, और आप पढ़ रहे हैं टॉप सीक्रेट। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो अपनी कठोर नीतियों और अडिग रवैये के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में बेसिक शिक्षा विभाग के मुद्दों पर अचानक नरम रुख अपनाया है। विशेष रूप से प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती और स्कूल मर्जर नीति को लेकर उनकी चुप्पी टूट गई है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि योगी, जो स्कूल मर्जर के फैसले पर अड़े थे और शिक्षक भर्ती पर एक शब्द बोलने को तैयार नहीं थे, ने अचानक बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक बुलाई और एक के बाद एक बड़े निर्देश जारी कर दिए?
यह सवाल पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। योगी सरकार की स्कूल मर्जर नीति को लेकर अभिभावकों, शिक्षकों और ग्राम प्रधानों में भारी असंतोष था। जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे थे, और बच्चों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। मर्जर नीति के तहत कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद कर उन्हें नजदीकी स्कूलों में मिलाने का फैसला लिया गया था। सरकार का तर्क था कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी। लेकिन विरोधियों का कहना था कि यह नीति ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा तक पहुंच को सीमित कर देगी। हाई कोर्ट ने इस नीति को संवैधानिक करार दिया, लेकिन मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां इसकी सुनवाई होने वाली है।
इसी बीच, योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां 50 से अधिक छात्र हैं, वहां स्कूलों को स्वतंत्र रूप से संचालित किया जाए। खाली स्कूल भवनों में बाल वाटिका और आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाएंगे। सबसे बड़ा निर्देश था शिक्षक भर्ती का – योगी ने खाली पदों को भरने के लिए तत्काल अधियाचन भेजने और समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। यह वही योगी हैं, जो 2018 के बाद से शिक्षक भर्ती पर चुप थे।
तो सवाल यह है कि यह बदलाव क्यों? सूत्रों की मानें तो बीजेपी के कोर वोटर बेस, यानी प्राइमरी शिक्षकों, को नाराज करने का डर इस यू-टर्न की मुख्य वजह है। प्राइमरी शिक्षक न केवल शिक्षा व्यवस्था का आधार हैं, बल्कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में चुनावों में भी अहम भूमिका निभाते हैं। हाल के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की हार के बाद संगठन की एक 15 पन्नों की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि नाराज बीएलओ ने वोटर लिस्ट से बीजेपी समर्थकों के नाम काट दिए थे। यह संदेश योगी तक पहुंचा कि शिक्षकों को नाराज करना 2027 के विधानसभा चुनावों में भारी पड़ सकता है।
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इसके अलावा, आर्टिकल 21ए, जो 14 साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है, इस मामले में सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट में मर्जर नीति के खिलाफ याचिका और शिक्षकों की कमी का मुद्दा योगी सरकार के लिए गले की फांस बन रहा है। यही वजह है कि योगी ने नरम रुख अपनाते हुए शिक्षक भर्ती और स्कूल संचालन को लेकर बड़े ऐलान किए।
योगी आदित्यनाथ के हालिया निर्देश
निर्देश | विवरण |
---|---|
शिक्षक भर्ती | खाली पदों के लिए तत्काल अधियाचन भेजा जाए और समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो। |
स्कूल मर्जर | 50 से अधिक छात्रों वाले स्कूल स्वतंत्र रूप से संचालित हों। |
खाली स्कूल भवन | बाल वाटिका, आंगनबाड़ी केंद्र और प्री-प्राइमरी शिक्षा के लिए उपयोग हों। |
शिक्षक-छात्र अनुपात | आदर्श स्थिति में लाया जाए ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित हो। |
FAQ
- योगी आदित्यनाथ ने स्कूल मर्जर नीति पर यू-टर्न क्यों लिया?
योगी का यू-टर्न बीजेपी के कोर वोटर बेस, यानी प्राइमरी शिक्षकों, को नाराज करने के डर और सुप्रीम कोर्ट में मर्जर नीति के खिलाफ याचिका के कारण है। - शिक्षक भर्ती पर योगी का नया रुख क्या है?
योगी ने खाली पदों को भरने के लिए तत्काल अधियाचन भेजने और समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। - स्कूल मर्जर नीति का विरोध क्यों हो रहा है?
अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि यह नीति ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा तक पहुंच को सीमित कर देगी और ड्रॉपआउट दर बढ़ाएगी। - सुप्रीम कोर्ट में मर्जर नीति का क्या मामला है?
सुप्रीम कोर्ट मर्जर नीति के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार है, जिसमें तर्क दिया गया है कि यह शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करता है।
Disclaimer:
यह लेख सूचना और विश्लेषण के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों जैसे समाचार लेखों, सोशल मीडिया पोस्ट्स और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। यह लेख किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के प्रति पक्षपातपूर्ण नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि वे स्वतंत्र रूप से तथ्यों की जांच करें।
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