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ट्रंप का टैरिफ वार: भारत के लाखों जॉब्स पर सीधा खतरा! जानिए किन सेक्टर्स पर सबसे बड़ा असर

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अमेरिका के नए टैरिफ के बाद भारतीय एक्सपोर्ट और नौकरियों पर क्या पड़ेगा असर—एक सरल लेकिन तथ्यपूर्ण विश्लेषण

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अमेरिका ने भारत पर नए टैरिफ लगा दिए हैं। इसका सीधा असर हमारे रत्न-आभूषण, चमड़ा, फर्नीचर, झींगा (सी-फूड) और टेक्सटाइल जैसे बड़े एक्सपोर्ट सेक्टर्स पर पड़ सकता है। भारत–अमेरिका का कुल व्यापार लगभग 129.2 अरब डॉलर का है और इसमें भारत को करीब 45.7 अरब डॉलर का नेट फायदा हुआ करता था—यानी हम ट्रेड बेनिफिट में रहते थे।

भारत अमेरिका को मुख्य रूप से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा-फार्मा, रत्न-आभूषण और टेक्सटाइल भेजता है। टैरिफ बढ़ते ही 100 का माल 125 या उससे ज्यादा में बिकेगा, जिससे प्रतिस्पर्धा कमज़ोर पड़ती है।

टेक्सटाइल पर सबसे बड़ा खतरा

भारत का टेक्सटाइल सेक्टर अमेरिका-निर्भर है: हमारे कुल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट का लगभग 28% अकेले अमेरिका जाता है। यह करीब 10.3 बिलियन डॉलर का व्यापार है। 25%–50% तक टैरिफ लगने से अमेरिकी बाज़ार में भारतीय कपड़ा महंगा पड़ेगा, ऑर्डर घट सकते हैं और इसका सबसे सीधा असर एमएसएमई और लेबर-इंटेंसिव यूनिट्स की नौकरियों पर पड़ेगा।

रत्न-आभूषण और सी-फूड: डबल झटका

भारत हर साल लगभग 12 बिलियन डॉलर के रत्न-आभूषण एक्सपोर्ट करता है—सूरत जैसे हब की रीढ़ यही उद्योग है। टैरिफ बढ़ने से ऑर्डर और मार्जिन दोनों पर दबाव आएगा।

इसी तरह सी-फूड/झींगा का बिज़नेस करीब 3 बिलियन डॉलर (लगभग 24,000 करोड़ रु.) का है। इस पर असर से खासकर पश्चिम बंगाल और तटीय राज्यों में दिक्कत बढ़ेगी।

कौन से सेक्टर अभी सुरक्षित?

  • फार्मा (जेनेरिक दवाएं): अमेरिका को भारत से सस्ती जेनेरिक मेडिसिन मिलती हैं, इसलिए फिलहाल यहां टैरिफ का सीधा प्रहार नहीं है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स/स्मार्टफोन: स्मार्टफोन मार्केट पर अभी टैरिफ नहीं लगा। इलेक्ट्रॉनिक्स पर सख्ती के लिए अमेरिका को अपने Section 232 की समीक्षा करनी होगी।

नौकरियों और जीडीपी पर संभावित असर

GTRI के अनुसार, भारत का लगभग 60 अरब डॉलर का यूएस-एक्सपोर्ट जोखिम में है। नतीजा—लाखों नौकरियों पर खतरा और जीडीपी पर करीब 0.6% तक दबाव। सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल (टेक्सटाइल, सी-फूड) और गुजरात (रत्न-आभूषण) को झेलना पड़ सकता है।

भारत सरकार की रणनीति: नुकसान को अवसर में बदलना

  • स्वदेशी पर जोर: त्योहारों के मौसम में Made in India खरीदने की अपील—घरेलू मांग से उद्योगों को सहारा।
  • नए बाज़ारों की तलाश: अमेरिका की कमी पूरी करने के लिए 40 देशों पर फोकस—यूके, जापान, साउथ कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली आदि।
  • एफटीए और नए क्षेत्र: यूरोप के साथ समझौते आगे बढ़ाना; दक्षिण एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उभरते बाज़ारों पर नज़र।
  • निर्यात प्रोत्साहन मिशन: एक्सपोर्ट प्रमोशन व मार्केटिंग सपोर्ट के लिए ₹2000 करोड़ का पैकेज प्रस्तावित, ताकि उत्पादों की ब्रांडिंग/डिमांड बनाई जा सके।

ग्लोबल मैसेज: चुनौतियां हैं, पर भारत पर भरोसा भी

जापान ने अगले 10 वर्षों में भारत में $68 बिलियन के निवेश का संकेत दिया है। IMF ने भी भारत की ग्रोथ आउटलुक को विश्व में सबसे मजबूत बताया है। यानी वैश्विक विश्वास बना हुआ है—टैरिफ झटके के बावजूद भारत के पास बड़े अवसर मौजूद हैं।

बॉटम लाइन

अमेरिकी टैरिफ से भारत के ट्रेड और नौकरियों पर दबाव बढ़ना तय है—खासकर टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण और सी-फूड में। पर फार्मा और स्मार्टफोन फिलहाल सुरक्षित हैं। सरकार का फोकस नए बाजार, एफटीए और स्वदेशी मांग बढ़ाने पर है—यही अगले महीनों में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

FAQs – अमेरिकी टैरिफ और भारत पर असर

Q1. अमेरिकी टैरिफ से भारत को कितना नुकसान होगा?

लगभग 60 अरब डॉलर0.6% तक असर पड़ सकता है।

Q2. कौन-कौन से उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे?

मुख्य रूप से टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, सी-फूड, चमड़ा और फर्नीचर पर असर पड़ेगा।

Q3. क्या सभी सेक्टर प्रभावित होंगे?

नहीं, फिलहाल फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स (स्मार्टफोन) सेक्टर टैरिफ से बचे हुए हैं।

Q4. सरकार इस समस्या से निपटने के लिए क्या कर रही है?

भारत सरकार स्वदेशी पर जोर दे रही है, साथ ही 40 नए देशों में एक्सपोर्ट मार्केट खोज रही है और ₹2000 करोड़ का निर्यात प्रोत्साहन मिशन भी शुरू कर रही है।

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अमेरिका के टैरिफ से भारत के लिए चुनौतियां तो बढ़ी हैं, लेकिन नए बाजारों की तलाश और स्वदेशी पर जोर इन झटकों को कम कर सकते हैं। सरकार की सक्रिय नीतियों और वैश्विक भरोसे के चलते भारत इन मुश्किलों को अवसर में बदल सकता है।

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