Real Story लखनऊ के केसरबाग क्षेत्र में विश्वासघात, दुर्व्यवहार और हत्या की एक चौंकाने वाली कहानी सामने आई है, जहां एक 7 साल की बच्ची की सोशल मीडिया पर मदद की गुहार ने उसे न्याय दिलाने की बजाय भयानक मौत की ओर ले गई। यह मामला छल, पारिवारिक उपेक्षा और एक जघन्य अपराध को उजागर करता है, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया।
एक बच्ची की आवाज का दर्दनाक अंत: लखनऊ की सात साल की बच्ची की कहानी
लखनऊ के केसरबाग इलाके के खंदारी बाजार की शांत गलियों में, 14-15 जुलाई 2025 की रात एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे समुदाय को हिलाकर रख दिया। एक 7 साल की बच्ची, जिसकी मासूमियत और साहस ने सोशल मीडिया पर कुछ पल के लिए रोशनी बिखेरी, अपने ही अपार्टमेंट में मृत पाई गई। उसका शरीर कीड़ों से भरा हुआ था, जो एक भयानक हत्या की गवाही दे रहा था, जिसे कई दिनों तक छुपाया गया था। यह कहानी एक बच्ची की न्याय की पुकार से शुरू होकर विश्वासघात, छल और क्रूर हत्या की ओर बढ़ी।
यह सब तब शुरू हुआ जब इस नन्ही बच्ची ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उसने अपने बड़े पापा पर घिनौने कृत्य करने का आरोप लगाया। उसने रोते हुए बताया कि जब उसने यह बात अपनी दादी और बुआ को बताई, तो उसे समर्थन की बजाय मारपीट का सामना करना पड़ा। उसका यह साहसी कदम वायरल हो गया, जिसने न केवल जनता का ध्यान खींचा बल्कि पुलिस को भी हरकत में ला दिया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और आरोपी बड़े पापा, दादी और बुआ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना हुई और बच्ची के साहस को देशभर में सलाम किया गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कई महीनों बाद, 14 जुलाई 2025 की रात करीब 3:10 बजे, लखनऊ पुलिस कंट्रोल रूम में एक फोन आया, जिसमें उसी 7 साल की बच्ची की हत्या की सूचना दी गई। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो उन्हें एक भयावह दृश्य देखने को मिला: बच्ची का निर्जन शरीर, जो सड़ चुका था और कीड़ों से भरा हुआ था। बच्ची की मां, रोशनी, बिलख-बिलख कर रो रही थी और बार-बार अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रही थी। उसने दावा किया कि बच्ची के पिता, शाहरुख, ने दुश्मनी के चलते उसकी हत्या की।
हालांकि, पुलिस को मां की कहानी में कुछ खामियां नजर आईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि बच्ची की मौत सूचना मिलने से 36 से 48 घंटे पहले हो चुकी थी। इस देरी ने पुलिस को संदेह में डाल दिया। जांच आगे बढ़ी तो जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को हक्का-बक्का कर दिया।
रोशनी, जो एक बार डांसर थी, और उसका प्रेमी उदित जायसवाल इस अपराध के केंद्र में थे। 13 जुलाई 2025 को बच्ची ने अपनी मां और उदित को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। डर था कि बच्ची यह बात अपने पिता को बता देगी। रोशनी ने अपनी बेटी को चुप कराने की कोशिश की, लेकिन बच्ची ने जिद पकड़ ली कि वह अपने अब्बू को सब कुछ बता देगी। गुस्से में आकर रोशनी ने अपनी बेटी को मारना शुरू कर दिया। जब बच्ची जमीन पर गिर गई, तो रोशनी उसके पेट पर चढ़ गई। बच्ची की चीखें सुनकर उदित ने उसका मुंह दबाया, और रोशनी ने तब तक उसका गला घोंटा जब तक उसकी सांसें नहीं थम गईं।
अपने अपराध को छुपाने के लिए, दोनों ने बच्ची की लाश को बेड के नीचे छिपा दिया और दुर्गंध को दबाने के लिए उस पर परफ्यूम छिड़क दिया। उन्होंने उसी दिन घर पर एक पार्टी भी आयोजित की ताकि कोई शक न करे। दो दिनों तक वे लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाते रहे, होटलों में रुकते रहे और शाहरुख को फंसाने की साजिश रची। जब लाश से दुर्गंध असहनीय हो गई, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी, यह दावा करते हुए कि शाहरुख ने बच्ची की हत्या की।
पुलिस की जांच ने उनके झूठ को बेनकाब कर दिया। शाहरुख ने बताया कि मई 2025 में रोशनी ने उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया था। आगे की जांच में पता चला कि रोशनी ने पहले भी अपने सास, ननद और जेठ को फंसाने के लिए बच्ची को वीडियो बनाने के लिए उकसाया था, ताकि वह उदित के साथ बिना किसी रुकावट के रह सके। बच्ची की जिद और उसका सच बोलने का इरादा उसकी मौत का कारण बना।
पुलिस को यह भी पता चला कि रोशनी और उदित की मुलाकात एक डांस बार में हुई थी, जहां रोशनी काम करती थी। उदित की पहली पत्नी ने कथित तौर पर उसके दुर्व्यवहार के कारण आत्महत्या कर ली थी। इस मामले के खुलासे ने समुदाय और देश को सदमे में डाल दिया, यह सोचकर कि एक मां अपनी बेटी को केवल अपने अवैध संबंध को छुपाने के लिए मार सकती है।
रोशनी और उदित को गिरफ्तार कर लिया गया, और पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि इस नन्ही बच्ची को न्याय मिल सके, जिसका साहस कुछ पल के लिए चमका, लेकिन उसे सबसे भयावह तरीके से बुझा दिया गया। यह मामला घरों के भीतर छिपे खतरों और कमजोर आवाजों की रक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।
अस्वीकरण: यह कहानी रचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रदान की गई एक काल्पनिक कथा पर आधारित है। इसमें वर्णित किसी भी व्यक्ति, जीवित या मृत, या वास्तविक घटनाओं से कोई समानता पूरी तरह से संयोग है। प्रस्तुत विवरण सत्यापित नहीं हैं और इन्हें तथ्यात्मक नहीं माना जाना चाहिए। यह सामग्री बाल सुरक्षा और न्याय के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए है, और पाठकों से अनुरोध है कि वे ऐसे विषयों को संवेदनशीलता और सावधानी के साथ देखें।
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