REAL STORY -1 जुलाई 2025 को हरियाणा के हिसार जिले के बास बादशाहपुर गांव में स्थित करतार मेमोरियल स्कूल में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ। सुबह की प्रार्थना सभा में प्रिंसिपल जगबीर सिंह पानू छात्रों को अनुशासन, पढ़ाई और नैतिकता का महत्व समझा रहे थे। उनकी नजर 11वीं कक्षा के एक छात्र पर पड़ी, जिसके बाल बढ़े हुए थे। प्रार्थना के बाद उन्होंने उस छात्र को बुलाकर समझाया कि साफ-सुथरा रहना और अनुशासन में रहना कितना जरूरी है। उन्होंने कहा, “अगर तुम मेहनत करो और IAS या IPS बन जाओ, तो न केवल स्कूल बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र का नाम रोशन होगा।” छात्र ने इसे हल्के में लिया और अपने दोस्तों के साथ हंसते हुए क्लास में चला गया। उसने अपने दोस्त को बताया कि प्रिंसिपल रोज की तरह “वही ज्ञान” दे रहे थे—बाल कटवाओ, कपड़े ठीक रखो, दांत साफ करो। दोस्तों ने इस पर ठहाके लगाए, लेकिन यह हंसी जल्द ही एक भयानक घटना में बदल गई।
अगले दिन प्रिंसिपल ने फिर उस छात्र और उसके तीन दोस्तों को टोका, जो सभी एक ही गांव के थे और उसी गांव के रहने वाले थे, जहां से प्रिंसिपल स्वयं थे। ये चारों छात्र—तीन 11वीं और एक 12वीं कक्षा का—उदंड स्वभाव के थे और सोशल मीडिया पर अपनी “डॉन” वाली छवि बनाते थे। जनवरी 2025 में एक छात्र ने इंस्टाग्राम पर अवैध पिस्तौल के साथ फोटो डाला था, जो उनकी बदमाशी की मानसिकता को दर्शाता था। प्रिंसिपल की बार-बार टोका-टोकी उन्हें नागवार गुजरी। 10 जुलाई 2025 को गुरु पूर्णिमा का दिन था, जब स्कूल में यूनिट टेस्ट चल रहे थे। सुबह 10 बजे के आसपास दो छात्र प्रिंसिपल के ऑफिस के बाहर खड़े होकर उन्हें गालियां देने लगे। जब प्रिंसिपल बाहर आए, तो एक छात्र ने उन्हें पकड़ लिया और दूसरे ने चाकू से तीन बार उनके शरीर पर वार किए। प्रिंसिपल की चीखें गूंजीं, और चारों छात्र मौके से भाग गए, जो सीसीटीवी में कैद हो गया।
स्कूल स्टाफ ने तुरंत प्रिंसिपल को पास के निजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चाकू के वार से उनका लीवर फट गया था, और डॉक्टर उन्हें बचा न सके। इस घटना की खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैली, खासकर जब चारों छात्रों ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो डाला, जिसमें उन्होंने हत्या की जिम्मेदारी ली और प्रिंसिपल के बेटे को धमकी दी कि “1 लाख रुपये का इंतजाम करो, वरना उसकी बारी है।” इस वीडियो ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें पता चला कि चार छात्र भागे थे। पुलिस ने गांव के एक व्यक्ति से बाइक लेकर भागने की जानकारी भी हासिल की, जिसे छात्रों ने “कोल्ड ड्रिंक लेने” के बहाने लिया था। 11 जुलाई 2025 को मुड़ाल बस स्टैंड से चारों नाबालिग छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच में पता चला कि प्रिंसिपल जगबीर सिंह पानू, जो एक रिटायर्ड शिक्षक दयानंद के मंझले बेटे थे, ने दो साल पहले स्कूल को लीज पर लिया था। वह 52 वर्षीय ईमानदार और शालीन व्यक्ति थे, जो हर छात्र को बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करते थे। उनके दो बेटे थे—संजीव, जो MBBS की पढ़ाई कर रहा था, और समीर, जो वकालत की पढ़ाई कर रहा था। चारों आरोपी छात्रों के परिवारों को प्रिंसिपल अच्छे से जानते थे, और गांववाले अक्सर उनसे अपने बच्चों पर ध्यान देने की गुजारिश करते थे। लेकिन इन छात्रों को प्रिंसिपल की सलाह और टोका-टोकी बर्दाश्त नहीं हुई। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे प्रिंसिपल के “ज्ञान पेलन” से तंग आ चुके थे, जिसके चलते उन्होंने हत्या की साजिश रची।
यह घटना न केवल शिक्षा जगत के लिए एक झटका थी, बल्कि इसने माता-पिता की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए। सोशल मीडिया के दुरुपयोग और गलत संगत के प्रभाव ने इन छात्रों को अपराध की राह पर धकेल दिया। पुलिस ने चारों नाबालिगों को सुधार गृह भेज दिया, लेकिन इस घटना ने शिक्षकों और छात्रों के बीच विश्वास को कमजोर कर दिया। यह कहानी समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों की परवरिश, उनके दोस्तों का चयन और सोशल मीडिया के उपयोग पर नजर रखना कितना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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