क्या आप जानना चाहते हैं कि UP TGT और LT Grade GIC में क्या अंतर है? प्रम पाल ने TGT में सिलेक्शन के बाद भी क्यों नहीं जॉइन किया? कार्यशैली, वेतन, ट्रांसफर और सुकून के मामले में कौन सा पद है बेहतर? इस लेख में जानें सभी जवाब और चौंकाने वाले तथ्य!
UP TGT बनाम LT Grade GIC: कौन सा पद है बेहतर? जानें अंतर और प्रम पाल के फैसले का कारण
नमस्ते दोस्तों! अगर आप उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि UP TGT (Trained Graduate Teacher) और LT Grade GIC (Lecturer Grade Government Inter College) में क्या अंतर है? दोनों ही पद सम्मानित हैं, लेकिन इनके बीच कार्यशैली, वेतन, ट्रांसफर, और अन्य कई पहलुओं में अंतर हैं। इस लेख में हम चर्चा करेंगे कि शिक्षक प्रम पाल ने TGT में सिलेक्शन के बाद भी इसे क्यों नहीं जॉइन किया और दोनों पदों के बीच क्या-क्या अंतर हैं।
प्रम पाल ने TGT क्यों नहीं जॉइन किया?
प्रम पाल, एक अनुभवी शिक्षक, ने अपनी यूट्यूब वीडियो में बताया कि उन्होंने TGT 2016 में सिलेक्शन के बाद भी इस पद को जॉइन नहीं किया, भले ही उन्हें उनके गृह जनपद प्रतापगढ़ में स्कूल मिला था। उनके इस फैसले के पीछे कई कारण थे, जैसे मैनेजमेंट का दबाव, ट्रांसफर की कठिनाई, और कार्यशैली में अंतर। आइए, इन बिंदुओं को विस्तार से समझते हैं।
UP TGT और LT Grade GIC: प्रमुख अंतर
दोनों ही पदों में कई समानताएं हैं, जैसे 4600 ग्रेड पे, समान वेतनमान, और लगभग एक जैसी योग्यता। लेकिन कई महत्वपूर्ण अंतर भी हैं, जो आपके करियर के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। नीचे दी गई तालिका में इन अंतरों को स्पष्ट किया गया है:
पहलू | UP TGT (एडेड कॉलेज) | LT Grade GIC (राजकीय इंटर कॉलेज) |
---|---|---|
प्रकृति | अर्ध-सरकारी (एडेड कॉलेज) | पूर्ण सरकारी (राजकीय) |
रिटायरमेंट आयु | 62 वर्ष | 60 वर्ष |
ट्रांसफर | मुश्किल, मैनेजमेंट और खर्च पर निर्भर | अपेक्षाकृत आसान, मानदंड पूरे करने पर |
वर्कलोड | अधिक (6-8 घंटे पढ़ाना, अतिरिक्त कार्य) | कम (ज्यादातर 9वीं-10वीं की कक्षाएं) |
मैनेजमेंट का प्रभाव | अधिक (मैनेजमेंट का दबाव हो सकता है) | कम (प्रिंसिपल मुख्य बॉस, कम दखल) |
प्रमोशन | सीमित, स्कूल में सीट उपलब्धता पर निर्भर | बेहतर अवसर, BSA स्तर तक संभव |
सुकून | कम, मैनेजमेंट के कारण तनाव हो सकता है | अधिक, सरकारी सिस्टम में स्थिरता |
चुनाव में भागीदारी | संभव (पॉलिटिकली एक्टिव रह सकते हैं) | असंभव (सरकारी नियमों के कारण) |
प्रभारी प्रिंसिपल लाभ | 7600 ग्रेड पे, वेतन में बड़ा उछाल | कोई अतिरिक्त वेतन लाभ नहीं |
दोनों पदों की समानताएं
- वेतनमान और ग्रेड पे: दोनों में 4600 ग्रेड पे और समान वेतनमान।
- योग्यता: दोनों के लिए लगभग समान शैक्षिक योग्यता।
- कैडर: दोनों में शिक्षक 9वीं-10वीं कक्षा पढ़ाते हैं।
- सम्मान: दोनों ही पद अत्यंत सम्मानित और प्रतिष्ठित हैं।
प्रम पाल के फैसले का कारण
प्रम पाल ने बताया कि उन्होंने LT Grade GIC को इसलिए चुना क्योंकि:
- मैनेजमेंट का दबाव: एडेड कॉलेजों में मैनेजमेंट का प्रभाव और दबाव उनके लिए एक बड़ा कारण था। राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रिंसिपल मुख्य बॉस होता है, और दखल कम होता है।
- ट्रांसफर की सुविधा: LT Grade में ट्रांसफर अपेक्षाकृत आसान है, जबकि TGT में यह प्रक्रिया जटिल और खर्चीली है।
- वर्कलोड: राजकीय इंटर कॉलेजों में वर्कलोड कम होता है, क्योंकि ज्यादातर स्कूलों में केवल 9वीं-10वीं की कक्षाएं होती हैं, जबकि एडेड कॉलेजों में 6ठी से 12वीं तक पढ़ाना पड़ता है।
- सुकून और स्थिरता: सरकारी सिस्टम में काम करने से मानसिक सुकून और स्थिरता अधिक होती है।
- प्रमोशन के अवसर: LT Grade में प्रमोशन के बेहतर अवसर हैं, जैसे BSA स्तर तक पहुंचने की संभावना।
TGT के फायदे
हालांकि LT Grade GIC को चुनने के पीछे प्रम पाल के अपने कारण थे, लेकिन TGT के भी कुछ खास फायदे हैं:
- रिटायरमेंट आयु: 62 वर्ष तक सेवा का अवसर, जो 2 साल अतिरिक्त है।
- पॉलिटिकल एक्टिविटी: TGT शिक्षक चुनाव लड़ सकते हैं और पॉलिटिकली एक्टिव रह सकते हैं।
- प्रभारी प्रिंसिपल का लाभ: TGT में प्रभारी प्रिंसिपल बनने पर 7600 ग्रेड पे और वेतन में बड़ा उछाल मिलता है।
आपके लिए कौन सा पद बेहतर?
यह आपके व्यक्तिगत लक्ष्यों और प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। अगर आप स्थिरता, कम वर्कलोड, और आसान ट्रांसफर चाहते हैं, तो LT Grade GIC बेहतर हो सकता है। वहीं, अगर आप लंबी सेवा अवधि और पॉलिटिकल एक्टिविटी में रुचि रखते हैं, तो TGT आपके लिए उपयुक्त हो सकता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. UP TGT और LT Grade GIC में मुख्य अंतर क्या हैं?
UP TGT अर्ध-सरकारी (एडेड कॉलेज) है, जबकि LT Grade GIC पूर्ण सरकारी है। TGT में रिटायरमेंट 62 वर्ष और LT Grade में 60 वर्ष है। TGT में मैनेजमेंट का दबाव हो सकता है, जबकि LT Grade में वर्कलोड कम और सुकून अधिक है।
2. प्रम पाल ने TGT क्यों नहीं जॉइन किया?
प्रम पाल ने मैनेजमेंट के दबाव, ट्रांसफर की कठिनाई, अधिक वर्कलोड, और कम सुकून के कारण TGT को जॉइन नहीं किया।
3. क्या TGT शिक्षक चुनाव लड़ सकते हैं?
हां, TGT शिक्षक पॉलिटिकली एक्टिव रह सकते हैं और चुनाव लड़ सकते हैं, जबकि LT Grade GIC शिक्षकों को यह अनुमति नहीं है।
4. LT Grade GIC में ट्रांसफर कैसे होता है?
LT Grade GIC में ट्रांसफर अपेक्षाकृत आसान है, बशर्ते आप निर्धारित मानदंड पूरे करें। TGT में ट्रांसफर जटिल और खर्चीला होता है।
5. दोनों पदों का वेतनमान एक जैसा है?
हां, दोनों में 4600 ग्रेड पे और समान वेतनमान है। हालांकि, TGT में प्रभारी प्रिंसिपल बनने पर 7600 ग्रेड पे मिल सकता है।
डिस्क्लेमर:
यह लेख प्रम पाल के व्यक्तिगत अनुभव और उनके यूट्यूब वीडियो पर आधारित है। सभी जानकारी सामान्य अनुभवों और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। व्यक्तिगत परिस्थितियों और स्कूलों के आधार पर अनुभव भिन्न हो सकते हैं। कृपया अपने करियर के फैसले लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें और संबंधित अधिकारियों से सलाह लें।
निष्कर्ष
UP TGT और LT Grade GIC दोनों ही सम्मानित पद हैं, लेकिन इनके बीच कई अंतर हैं जो आपके करियर को प्रभावित कर सकते हैं। प्रम पाल का अनुभव हमें सिखाता है कि करियर का फैसला आपकी प्राथमिकताओं और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। क्या आप इस विषय पर अपने विचार साझा करना चाहेंगे? नीचे कमेंट करें और हमें बताएं कि आपके लिए कौन सा पद बेहतर है!
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