HomeBasic EducationUP SCHOOL - प्राथमिक स्कूलों का मर्जर है बड़ी साजिश? योगी सरकार...

UP SCHOOL – प्राथमिक स्कूलों का मर्जर है बड़ी साजिश? योगी सरकार के फैसले पर उठा बड़ा सवाल!

प्राइमरी स्कूल मर्जर पर मचा बवाल! गांव-गांव में विरोध, बच्चे और शिक्षक सड़कों पर। क्या यह शिक्षा को कमजोर करने की बड़ी योजना है? जानिए पूरी रिपोर्ट।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

उत्तर प्रदेश में चल रहे सरकारी प्राथमिक स्कूलों के समायोजन (मर्जर) को लेकर भारी विरोध हो रहा है। अध्यापक संगठन, विद्यार्थियों के अभिभावक और ग्रामीण जनता सड़कों पर उतर आए हैं। उनका मानना है कि यह कदम गरीब और ग्रामीण बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की एक साजिश है।

प्रश्न यह उठता है कि जब इन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक अधिकांशतः सिविल सर्विस की तैयारी छोड़कर आए होनहार युवा हैं, तो फिर ऐसी स्थिति क्यों बन रही है कि लोग अपने बच्चों को इन स्कूलों में भेजने से कतराते हैं?

सरकारी बनाम प्राइवेट स्कूल: सच्चाई आंकड़ों में

मापदंडसरकारी स्कूलप्राइवेट स्कूल
शिक्षकों की योग्यताB.Ed, BTC, CTET Qualifiedअक्सर प्रशिक्षित नहीं
वार्षिक शुल्क₹0 से ₹1,000₹12,000 से ₹60,000+
छात्र संख्या (2024-25)25-50 प्रति स्कूल150+
भवन की स्थितिमिश्रित (कुछ अच्छे, कुछ जर्जर)बेहतर
पठन सामग्रीएनसीईआरटी, फ्री बुक्सविभिन्न, कभी-कभी खराब

सबसे बड़ा सवाल: मर्जर क्यों?

कई लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ शिक्षा सुधार नहीं बल्कि खर्च कम करने का खेल है।

“जब 20,000 में शिक्षक उपलब्ध हैं तो 70,000 में क्यों रखें?” – आंदोलनकारी

यदि कम छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों को बंद किया गया, तो इससे गांवों के बच्चों की शिक्षा बाधित हो सकती है। नए परिसीमन के कारण कुछ गांवों की दूरी बढ़ गई है, जिससे बच्चे दूसरे गांव के स्कूलों तक नहीं जा पाएंगे।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. क्या सरकार सभी छोटे स्कूलों को बंद कर रही है?

नहीं, लेकिन जिन स्कूलों में छात्र संख्या बहुत कम है, वहां मर्जर की योजना बनाई जा रही है।
Q2. क्या इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा?

हां, जिन गांवों में स्कूल दूर होंगे, वहां के बच्चे स्कूल छोड़ सकते हैं या शिक्षा से वंचित हो सकते हैं।
Q3. क्या शिक्षकों की नौकरियां खतरे में हैं?

प्रत्यक्ष रूप से नहीं, लेकिन शिक्षकों की स्थानांतरण नीति और संख्या में कटौती के संकेत मिल रहे हैं।
Q4. क्या यह शिक्षा व्यवस्था सुधारने की कोशिश है या आर्थिक कटौती?

सरकार इसे शिक्षा सुधार कहती है, परंतु विशेषज्ञ और शिक्षक इसे छिपा हुआ बजट कटौती कार्यक्रम बता रहे हैं।

आंदोलन क्यों हो रहा है?

  • शिक्षकों को भय: “कहीं हम भी समायोजन के नाम पर हटा न दिए जाएं।”
  • अभिभावकों को डर: “बच्चे दूर स्कूल नहीं जाएंगे, वे या तो पढ़ाई छोड़ेंगे या प्राइवेट स्कूल का बोझ उठाएं।”
  • गांवों की भूगोलिक स्थिति: “सब गांव पास नहीं होते, दूरी बच्चों की पढ़ाई रोक सकती है।”

Disclaimer (अस्वीकरण):

इस लेख में प्रस्तुत विचार, बयान और विश्लेषण जनता की राय, शिक्षकों के बयान और सामाजिक आंदोलनों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं। सरकार द्वारा अभी तक अंतिम नीति स्पष्ट रूप से घोषित नहीं की गई है। यह रिपोर्ट किसी भी सरकारी नीति का विरोध या समर्थन नहीं करती बल्कि जनमानस की चिंता को सामने लाने का प्रयास है।

Shekhar
Shekharhttp://theartnews.in
I am blogger. I provided News by the Social media medium. All information is Given Truth in my knowledge but you checked before the follow the News. Be Happy Jay Hind By
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments