कानपुर में गूगल मैप टीम को चोर समझ बैठा गांव! कैमरे वाली कार देख मचा बवाल, जमकर की पिटाई
कानपुर (उत्तर प्रदेश), 28 अगस्त: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के कुछ गांवों में लंबे समय से चोरी की घटनाओं की चर्चा थी। गांव वाले सतर्क थे और हर नई गतिविधि पर बारीकी से नजर रख रहे थे। इसी दौरान गांव की गलियों में एक कार घूमती नजर आई, जिसकी छत पर एक बड़ा कैमरा लगा था। यह नजारा देखकर ग्रामीणों को शक हुआ कि चोरों का गिरोह इलाके की रेकी कर रहा है।
गांव वालों ने बिना देर किए कार को रोक लिया। कुछ लोगों ने कार में बैठे व्यक्तियों को बाहर निकाला और उनसे पूछताछ करने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि ग्रामीणों ने उनके साथ हाथापाई भी कर दी। साथ ही पुलिस को भी फोन कर बुला लिया गया।
पुलिस जब मौके पर पहुंची और जांच शुरू की तो असली सच्चाई सामने आई। कार में बैठे लोग कोई चोर नहीं बल्कि गूगल मैप की सर्वे टीम थे। यह टीम गांव की गलियों और सड़कों का डिजिटल मैप तैयार करने के काम से वहां आई थी। कार पर लगा कैमरा उसी काम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। लेकिन ग्रामीणों ने इसे गलत समझ लिया।
गूगल टीम के इंचार्ज संदीप गुर्जर ने बताया कि उनके पास केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की तरफ से मैपिंग का परमिट है। लेकिन गांव वालों ने उनकी बात सुने बिना ही हमला कर दिया। संदीप ने कहा कि यदि लोग पहले जानकारी लेते तो टीम उन्हें विस्तार से समझा देती।
पुलिस का बयान
एसीपी कृष्णकांत यादव ने बताया कि यह पूरा मामला गलतफहमी का नतीजा है। गूगल मैप टीम ने लोकल पुलिस या ग्राम प्रधान को पहले से सूचना नहीं दी थी। इसी कारण ग्रामीणों को संदेह हुआ और उन्होंने टीम को रोक लिया। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने ले जाकर बातचीत कराई और मामला शांत कराया।
गूगल टीम ने इस घटना को लेकर कोई लिखित शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया। वहीं, पुलिस ने टीम को सलाह दी कि भविष्य में किसी भी सर्वे से पहले स्थानीय प्रशासन और ग्राम प्रधान को जानकारी दे दें ताकि ऐसी गलतफहमी दोबारा न हो।
कानपुर की यह घटना दिखाती है कि जागरूकता की कमी और संचार की कमी कैसे गंभीर गलतफहमियों को जन्म दे सकती है। गूगल मैप टीम का उद्देश्य तकनीकी सर्वे करना था, लेकिन बिना जानकारी दिए हुए यह पहल ग्रामीणों के लिए संदेह का कारण बन गई।
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