वृंदावन के कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के 25 साल की लड़कियों पर दिए गए आपत्तिजनक बयान ने सोशल मीडिया और समाज में हंगामा मचा दिया है। उनके बयान की तीखी आलोचना के बाद माफी मांगने का वीडियो भी वायरल हो रहा है, लेकिन क्या यह माफी काफी है? जानिए पूरी कहानी और लोगों की प्रतिक्रियाएं।
मथुरा, वृंदावन के गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक और प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। हाल ही में एक धार्मिक सभा के दौरान उन्होंने 25 साल की अविवाहित लड़कियों के चरित्र पर टिप्पणी की, जिसने समाज के विभिन्न वर्गों में आक्रोश पैदा कर दिया। वायरल वीडियो में अनिरुद्धाचार्य ने कहा, “25 साल की लड़की चार जगह मुंह मार चुकी होती है। 14 साल की उम्र में शादी कर देनी चाहिए ताकि वो परिवार में घुल-मिल जाए।” इस बयान को कई लोगों ने महिलाओं के प्रति अपमानजनक और रूढ़िगत माना, जिसके बाद मथुरा में सड़कों और सोशल मीडिया पर विरोध का सिलसिला शुरू हो गया।
विवाद का कारण और सामाजिक प्रतिक्रिया
अनिरुद्धाचार्य के इस बयान ने न केवल सामाजिक संगठनों और महिला वकीलों को आक्रोशित किया, बल्कि आम लोगों और राजनीतिक दलों ने भी इसकी कड़ी निंदा की। मथुरा बार एसोसिएशन की महिला अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर अनिरुद्धाचार्य का पुतला फूंका और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। अधिवक्ता प्रियदर्शनी मिश्रा ने इसे “यौनाचार की श्रेणी में आने वाला बयान” करार दिया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की प्रदेश अध्यक्ष गुंजन शर्मा ने कहा, “ऐसे बयान आध्यात्मिक व्यक्ति को शोभा नहीं देते।” समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय और शिवसेना नेत्री प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस बयान की आलोचना की और कार्रवाई की मांग की।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अनिरुद्धाचार्य को जमकर ट्रोल किया। एक यूजर ने लिखा, “ये लोग समाज सुधारक बनते हैं, लेकिन ऐसी सोच हमारी बहन-बेटियों का अपमान है।” एक अन्य यूजर ने उन्हें “कथित भोगवाचक” तक कह डाला।
अनिरुद्धाचार्य की माफी
विवाद बढ़ने के बाद अनिरुद्धाचार्य ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा, “मेरी बात का गलत अर्थ निकाला गया। मेरा उद्देश्य चरित्र निर्माण पर जोर देना था। अगर मेरी बात से किसी बहन-बेटी को ठेस पहुंची हो, तो मैं क्षमा मांगता हूं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि वायरल वीडियो को AI के जरिए तोड़ा-मरोड़ा गया।
हालांकि, उनकी माफी के बावजूद विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। मथुरा में महिला संगठनों और स्थानीय लोगों ने इसे “घड़ियाली आंसू” करार दिया। कई लोगों का मानना है कि यह पहली बार नहीं है जब अनिरुद्धाचार्य विवादों में घिरे हैं। 2022 में उन्होंने महिलाओं की सुंदरता को “दोष” बताया था, और 2024 में भगवान शिव को “कृष्ण का साला” कहने पर भी उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी।
पहले भी विवादों में रहे हैं अनिरुद्धाचार्य
अनिरुद्धाचार्य की हास्यपूर्ण शैली और सोशल मीडिया पर वायरल रील्स उन्हें लोकप्रिय बनाती हैं, लेकिन उनकी टिप्पणियां अक्सर लैंगिक भेदभाव और रूढ़ियों को बढ़ावा देने का आरोप झेलती हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग उन्हें “पाखंडी” और “गालीबाज कथावाचक” कहकर आलोचना करते हैं। एक यूजर ने लिखा, “ये लोग धर्म की आड़ में मसखरापन करते हैं।”
क्या कहता है कानून?
भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है। अनिरुद्धाचार्य का 14 साल की उम्र में शादी की वकालत करना न केवल सामाजिक रूप से आपत्तिजनक है, बल्कि कानून के खिलाफ भी माना जा रहा है। मथुरा बार एसोसिएशन ने उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
आगे क्या?
यह विवाद न केवल अनिरुद्धाचार्य की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों की जिम्मेदारी पर भी बहस छेड़ रहा है। क्या उनकी माफी इस मामले को शांत कर पाएगी, या यह विवाद और गहराएगा? सोशल मीडिया पर यह चर्चा अभी भी जोरों पर है।
आप इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं? क्या अनिरुद्धाचार्य की माफी पर्याप्त है, या उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री पर आधारित है। यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और किसी भी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ पक्षपातपूर्ण नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि वे स्वयं तथ्यों की जांच करें।
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