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अमेरिका का भारत पर 25% टैरिफ का हथौड़ा: राजस्थान के उद्योगों पर क्या होगा असर?

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विवरण: अमेरिका द्वारा भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा ने व्यापारिक जगत में हलचल मचा दी है। राजस्थान, जो जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, और केमिकल्स जैसे क्षेत्रों में अमेरिका को 18,000 करोड़ का निर्यात करता है, इस टैरिफ से कैसे प्रभावित होगा? क्या बढ़ेगी बेरोजगारी? जानिए इस विशेष चर्चा में।

मुख्य समाचार:

अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक वार्ताओं में एक नया मोड़ आया है। 1 अगस्त, 2025 को अमेरिका ने भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और संभावित पेनल्टी लगाने की घोषणा की, जिसने न केवल भारत बल्कि राजस्थान जैसे निर्यात-प्रधान राज्यों के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। राजस्थान, जो अपने जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, मार्बल, और केमिकल उद्योगों के लिए जाना जाता है, अमेरिका को प्रतिवर्ष 18,000 करोड़ रुपये का निर्यात करता है। लेकिन इस नए टैरिफ के लागू होने से क्या राजस्थान के इन उद्योगों पर संकट के बादल मंडराने वाले हैं?

राजस्थान पर प्रभाव:


फेडरेशन ऑफ राजस्थान एक्सपोर्टर्स के अध्यक्ष श्री राजीव अरोड़ा के अनुसार, राजस्थान के छोटे और कुटीर उद्योग, जो जयपुर के जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर, भिवाड़ी के केमिकल उद्योग, और मार्बल व हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, इस टैरिफ से सीधे प्रभावित होंगे। जयपुर, जो विश्व की सबसे बड़ी रंगीन पत्थरों की मंडी है, अमेरिका को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का निर्यात करता है। इसके अलावा, मार्बल और ग्रेनाइट (1,000 करोड़), केमिकल्स (1,800 करोड़), और इंजीनियरिंग गुड्स (2,000 करोड़) जैसे क्षेत्र भी इस टैरिफ की चपेट में आएंगे।

क्या बढ़ेगी बेरोजगारी?


श्री अरोड़ा ने चेतावनी दी कि टैरिफ के कारण निर्यात में कमी से राजस्थान में रोजगार पर असर पड़ सकता है। खासकर भिवाड़ी और नीमराना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में, जहां केमिकल और इंजीनियरिंग उद्योग फल-फूल रहे हैं, वहां मंदी की आशंका है। इसके अतिरिक्त, राजस्थान के हस्तशिल्प और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्र, जो छोटे कारीगरों पर निर्भर हैं, भी प्रभावित हो सकते हैं।

चुनौती को अवसर में बदलने की जरूरत:


इस संकट को अवसर में बदलने के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा। मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं को और प्रभावी बनाने, टैक्सेशन में सुधार करने, और भारतीय उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, ब्रेन ड्रेन को रोकने के लिए देश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराने होंगे। श्री अरोड़ा ने सुझाव दिया कि सरकार को कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका के साथ वार्ता तेज करनी चाहिए और साथ ही अन्य देशों, जैसे यूरोप और यूके, के साथ व्यापारिक समझौतों को मजबूत करना चाहिए।

आगे की राह:


अमेरिका का यह कदम न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए भी एक चुनौती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस टैरिफ से भारत का 31 बिलियन डॉलर का व्यापार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में, भारत को अपनी आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति को और मजबूत करना होगा। राजस्थान जैसे राज्यों को स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने और वैकल्पिक बाजारों की तलाश करने की जरूरत है।

निष्कर्ष:
यह टैरिफ संकट राजस्थान के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, लेकिन सही नीतियों और रणनीतियों के साथ इसे अवसर में बदला जा सकता है। क्या भारत और राजस्थान इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं? यह समय बताएगा।

अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहें और इस चर्चा में अपनी राय साझा करें!

Shekhar
Shekharhttp://theartnews.in
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