Real story ये कहानी शुरू होती है दिल्ली के कल्याण विहार से, जुलाई 2023 की। एक बंद कोठी में चोरी हो जाती है, और इसके बाद जो खुलासा होता है, वो किसी के लिए भी चौंकाने वाला है। आइए, इस दिलचस्प कहानी को समझते हैं।
बेटी के लिए रिश्ता तलाश रहा था IAS अधिकारी
उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में काम करने वाले एक अधिकारी अपनी बेटी के लिए अच्छा लड़का ढूंढ रहे थे। वो अपने ऑफिस, दोस्तों, रिश्तेदारों, हर किसी से कहते, “भाई, कोई अच्छा लड़का हो तो बताना।” दिन बीतते गए, और एक दिन उनके पास एक शख्स आता है। वो कहता है, “साहब, आपके समाज का एक लड़का है। दिल्ली में पार्किंग का ठेकेदार है, अच्छा कमाता है। घर-परिवार, रहन-सहन, सब शानदार है। अखलाक अच्छे हैं, लड़का देखने में भी बढ़िया है। अगर आप कहें, तो रिश्ते की बात शुरू कर दूँ।”
अधिकारी को बात जँच गई। बोले, “अच्छा कमाता है तो कोई दिक्कत नहीं। बात आगे बढ़ाओ।” लड़के को देखा, पसंद आया, और रिश्ता तय हो गया। धूमधाम से शादी हुई, और बेटी को विदा कर दिया गया। सब कुछ ठीक चल रहा था।
लखनऊ में शिफ्ट, बच्चों की पढ़ाई
लड़के ने अपनी पत्नी और बच्चों के भविष्य को देखते हुए लखनऊ में एक मकान खरीद लिया। बच्चों का दाखिला शहर के नामी स्कूलों में करवाया। लेकिन एक दिन अचानक पुलिस उनके घर पहुँच जाती है। तलाशी शुरू होती है। वजह? लड़का करोड़पति था, और पुलिस को शक था कि उसकी कमाई का राज कुछ और है।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। ये लड़का, जो खुद को पार्किंग का ठेकेदार बताता था, असल में चोर था! पिछले 22 सालों से वो दिल्ली में बड़ी-बड़ी कोठियों में चोरी कर रहा था। 200 से ज्यादा चोरियाँ कर चुका था! परिवार को यकीन ही नहीं हुआ, लेकिन पुलिस ने पुख्ता सबूतों के साथ सारी सच्चाई सामने रख दी।
कल्याण विहार की चोरी और पुलिस की तफ्तीश
जुलाई 2023 में दिल्ली के कल्याण विहार में एक बंद कोठी से चोरी हुई। अगले दिन कोठी के मालिक लौटे तो देखा कि सामान गायब है, और फर्श पर खून के धब्बे हैं। वो तुरंत पुलिस स्टेशन गए और शिकायत दर्ज कराई।
आईपीएस अधिकारी उत्कर्ष ने मामले की कमान संभाली और एक टीम बनाई। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। एक स्कूटर, जिसका नंबर था DL4NC8081, संदिग्ध दिखा। स्कूटर पर एक शख्स सामान लेकर जाता दिखा। नंबर ट्रेस करने पर पता चला कि स्कूटर विनोद थापा के नाम पर रजिस्टर्ड है, जो नेपाल का रहने वाला था, लेकिन दिल्ली में रहता था।
पुलिस ने विनोद को हिरासत में लिया। उसने कहा, “साहब, स्कूटर मेरा है, लेकिन उसे मेरा जीजा मनोज चौबे चलाता है।” पुलिस मनोज चौबे तक पहुँची, लेकिन उसका असली नाम कुछ और निकला। जांच आगे बढ़ी, और पता चला कि मनोज सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।
करोड़ों की संपत्ति, दो पत्नियाँ!
पुलिस सिद्धार्थनगर पहुँची। वहाँ मनोज के परिवार ने कहा, “वो तो पार्किंग का बड़ा ठेकेदार है। स्मिता लॉज उसकी पत्नी के नाम पर है। नेपाल में होटल है, और सिद्धार्थनगर में एक हॉस्पिटल किराए पर दिया है, जिससे हर महीने 2 लाख रुपये आते हैं। दिल्ली और लखनऊ में भी उसकी प्रॉपर्टी है।”
लेकिन जब पुलिस ने और गहराई से जांच की, तो पता चला कि मनोज की दो पत्नियाँ हैं। दिल्ली में सपना नाम की एक नेपाली लड़की से शादी की थी, और सिद्धार्थनगर में सिंचाई विभाग के अधिकारी की बेटी स्मिता से। लखनऊ में उसके बच्चे पढ़ रहे थे। पुलिस भी हैरान थी कि इतनी संपत्ति वाला शख्स चोरी क्यों करेगा?
1997 से चोरी का सिलसिला
पूछताछ में मनोज ने सच्चाई उगली। 1997 में वो सिद्धार्थनगर से दिल्ली आया था। कीर्ति नगर पुलिस स्टेशन की कैंटीन में काम करता था। वहाँ उसने चोरी की, पकड़ा गया, और जेल गया। जेल से छूटने के बाद उसने चोरी को ही पेशा बना लिया। वो बंद कोठियों को निशाना बनाता था। अखबारों का ढेर, सूखे पौधे, या घर पर जाले देखकर उसे पता चल जाता था कि कोठी खाली है।
वो मॉडल टाउन, रोहिणी, अशोक विहार, पीतमपुरा जैसी पॉश कॉलोनियों में चोरी करता। चोरी का माल दूर-दूर बेचता और उस पैसे से प्रॉपर्टी खरीदता। परिवार को लगता था कि वो पार्किंग का ठेकेदार है, लेकिन वो अकेले ही चोरी करता था।
आखिरी चोरी में कैसे पकड़ा गया?
कल्याण विहार की चोरी में मनोज को चोट लगी और वो बेहोश हो गया। कोठी बंद थी, इसलिए उसे वक्त मिला, लेकिन सीसीटीवी ने उसे पकड़ लिया। पुलिस ने जब तफ्तीश की, तो पता चला कि उसने 9 चोरियों में अलग-अलग नाम इस्तेमाल किए थे।
सबक: रिश्ते से पहले तफ्तीश जरूरी
इस कहानी का मकसद जागरूक करना है। रिश्ता तय करने से पहले लड़के की पूरी पड़ताल करें। उसका काम, रहन-सहन, सबकुछ वेरिफाई करें। वरना बाद में पछतावा हो सकता है। जय हिंद, जय भारत!
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