Election Commission Press Conference: Rahul Gandhi vs EC विवाद पर बड़ा बयान, Anurag Thakur पर चुप्पी क्यों?
Election Commission Latest News – मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में Rahul Gandhi को हलफनामा या माफी मांगने की सलाह दी। लेकिन Anurag Thakur पर सवाल क्यों टाल दिए गए? जानिए पूरी कहानी और EC के तर्क।
1. डेढ़ महीने की खामोशी, अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस
पिछले डेढ़ महीने से सवाल उठ रहा था कि चुनाव आयोग चुप क्यों है? आखिरकार रविवार, 17 अगस्त को पूरा आयोग मीडिया के सामने आया। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई ऐसे जवाब मिले जिन्होंने और सवाल खड़े कर दिए।
2. राहुल गांधी पर सख्ती, अनुराग ठाकुर पर नरमी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा –
“अगर राहुल गांधी तीन हफ्ते में हलफनामा नहीं देते या माफी नहीं मांगते तो उनके आरोप निराधार मान लिए जाएंगे।”
लेकिन चौंकाने वाली बात ये रही कि बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर पर कोई सवाल नहीं पूछा गया। जबकि ठाकुर ने एक साथ पांच लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर वोट चोरी के आरोप लगाए थे।
तो सवाल उठता है – EC सिर्फ राहुल गांधी पर क्यों सख्ती दिखा रहा है?
3. डेढ़ लाख वोटर पर आरोप – जांच कैसे होगी?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में 1.5 लाख गड़बड़ियां हैं।
इस पर चुनाव आयोग का जवाब था –
“बिना सबूत के इतने मतदाताओं को नोटिस नहीं भेज सकते।”
लेकिन फिर सवाल ये है कि जब एक वोट भी फर्जी नहीं होना चाहिए, तो 1.5 लाख वोटरों की जमीनी जांच क्यों नहीं हो सकती?
क्या BLO और SDM की टीमें घर-घर जाकर जांच नहीं कर सकतीं?
4. सीसीटीवी फुटेज और प्राइवेसी का बहाना
राहुल गांधी ने सीसीटीवी फुटेज की मांग की।
लेकिन EC ने कहा –
“यह मतदाताओं की प्राइवेसी का उल्लंघन होगा।”
अब बड़ा सवाल –
तो फिर सीसीटीवी लगाते ही क्यों हैं? अगर गड़बड़ी हुई है तो फुटेज क्यों डिलीट कर दिया गया?
5. महाराष्ट्र और बिहार में वोटर लिस्ट का बवाल
- बिहार में 65 लाख नाम काटे गए।
- महाराष्ट्र में 5 महीने में 1 करोड़ नए मतदाता जुड़ गए।
राहुल गांधी ने पूछा – “क्या यह NRC की आड़ में SIR (Special Intensive Revision) चल रहा है?”
आयोग ने जवाब दिया – “यह सिर्फ 20 सालों से लंबित मृत मतदाताओं की एंट्री को हटाने की प्रक्रिया है।”
6. ज़ीरो मकान नंबर वाले वोटर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में EC ने एक अजीब तर्क दिया –
“कई लोगों के घर का नंबर पंचायत या नगर पालिका ने नहीं दिया। इसलिए कंप्यूटर में उनका मकान नंबर ‘0’ आ जाता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वे फर्जी वोटर हैं।”
लोगों ने पूछा – “तो क्या ये लोग लैम्प पोस्ट के नीचे रहते हैं?“
7. पत्रकारों के तीखे सवाल, आयोग के गोलमोल जवाब
फ्रीलांस पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता ने जब पूछा कि इतनी हड़बड़ी में बिहार में SIR क्यों कराया गया, तो आयोग सिर्फ कानूनी दलीलें देता रहा।
कई सवालों पर आयोग के जवाब बेहद बचकाने लगे।
8. सबसे अहम सवाल – क्या आयोग पक्षपाती है?
- राहुल गांधी से हलफनामा मांगा गया।
- अनुराग ठाकुर से अब तक कोई जवाब नहीं मांगा गया।
- विपक्ष की शिकायतों पर EC ने जांच टाल दी।
लोग पूछ रहे हैं –
क्या चुनाव आयोग वाकई सभी पार्टियों के लिए समान है?
या फिर पक्षपात का आरोप सच साबित हो रहा है?
निचोड़
चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जनता को वो जवाब नहीं मिला जिसकी उम्मीद थी।
राहुल गांधी के आरोपों का ठोस खंडन नहीं हुआ और कई मुद्दों पर आयोग रक्षात्मक दिखाई दिया।
सबसे बड़ा सवाल यही है – अगर एक भी वोट फर्जी नहीं होना चाहिए तो फिर लाखों वोटरों की जांच क्यों टाली जा रही है?
इस खबर में आपको क्या लगता है – चुनाव आयोग का रवैया पक्षपाती है या राहुल गांधी बेवजह आरोप लगा रहे हैं?
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