Home Basic Education सरकार बैक फुट पर,अब 1 किलोमीटर अधिक दूरी वाले मर्ज किए गए...

सरकार बैक फुट पर,अब 1 किलोमीटर अधिक दूरी वाले मर्ज किए गए स्कूल होंगे वापस

0
School merger news
School merger news
No heading found
[l-w]

विवरण: उत्तर प्रदेश में विद्यालय पेयरिंग की नई योजना ने मचाया हड़कंप! स्कूलों के मर्जर से शिक्षा में सुधार का दावा, लेकिन क्या हैं इसके पीछे के नियम और चुनौतियां? जानिए कैसे सरकार की यह नीति बदल सकती है ग्रामीण शिक्षा का चेहरा!

मुख्य लेख:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

उत्तर प्रदेश सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) को और मजबूत करने के लिए विद्यालय पेयरिंग की व्यवस्था ने नया रंग लिया है। सरकार का दावा है कि इस नीति से स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा, और ग्रामीण इलाकों में बच्चों का लर्निंग गैप कम होगा। लेकिन इस मर्जर योजना ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। लखनऊ मण्डल में ज्यादातर स्कूलों को इस नीति के तहत शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन कुछ खामियां ऐसी हैं, जिन्हें ठीक करने की जरूरत है। आइए, जानते हैं इस योजना के प्रमुख बिंदु और चुनौतियां:

विद्यालय पेयरिंग के अहम बिंदु:

  1. दूरी का नियम: सरकार ने तय किया है कि बस्ती से स्कूल की दूरी 1 किमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जैसा कि उ0प्र0 निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2011 में कहा गया है। लेकिन क्या यह हर जगह लागू हो पा रहा है?
  2. छात्र संख्या का पेंच: 50 से ज्यादा बच्चों वाले स्कूलों को मर्ज न करने की बात है, लेकिन शासनादेश में इसकी स्पष्टता का अभाव है।
  3. एकल स्कूलों का क्या?: अगर किसी ग्राम पंचायत में सिर्फ एक स्कूल है, तो उसे मर्जर से बाहर रखने की सलाह दी गई है। लेकिन कई जगह इसका पालन नहीं हो रहा।
  4. भौगोलिक रुकावटें: हाईवे, रेलवे लाइन, या नदी-नालों के बीच मर्जर न हो, लेकिन कुछ स्कूलों में यह नियम तोड़ा गया है। सरकार से इसे ठीक करने की मांग उठ रही है।
  5. संसाधनों की कमी: मर्ज किए गए स्कूलों में कक्ष, शौचालय जैसे संसाधनों की जांच जरूरी है। कई स्कूलों में ये सुविधाएं नाकافی हैं।
  6. बालवाटिका का सवाल: मर्ज किए गए स्कूलों को बालवाटिका में बदलने की बात है, लेकिन कौन से संसाधन वहां रहेंगे और कौन से शिफ्ट होंगे, यह साफ नहीं है।
  7. छात्र-शिक्षक अनुपात: मर्जर के बाद कई स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) गड़बड़ा सकता है। इसे शिक्षक समायोजन में ठीक करने की जरूरत है।
  8. सत्यापन की जरूरत: दूरी और संसाधनों का दोबारा सत्यापन कर त्रुटियों को तुरंत ठीक करने की मांग जोर पकड़ रही है।

लखनऊ मण्डल में सीतापुर को छोड़कर सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पेयरिंग किए गए स्कूलों की जांच करें। दूरी, छात्र संख्या, और बुनियादी सुविधाओं में गड़बड़ी मिलने पर तुरंत सुधार किया जाए।

क्या है असली मसला?
यह नीति ग्रामीण शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का वादा करती है, लेकिन जमीन पर कई चुनौतियां हैं। माता-पिता और शिक्षक इस बात से चिंतित हैं कि दूर के स्कूलों में बच्चों को भेजना मुश्किल होगा। साथ ही, संसाधनों की कमी और अस्पष्ट नियमों ने सरकार की उलटी गिनती शुरू कर दी है। क्या यह नीति वाकई शिक्षा का कायाकल्प कर पाएगी, या यह सिर्फ कागजी योजना बनकर रह जाएगी?


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

1. विद्यालय पेयरिंग योजना क्या है?
यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें छोटे स्कूलों को बड़े स्कूलों के साथ जोड़ा जाता है ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़े।

2. इस नीति का लक्ष्य क्या है?
शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाना, लर्निंग गैप कम करना, और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को सशक्त करना।

3. क्या सभी स्कूलों का मर्जर होगा?
नहीं, 50 से ज्यादा छात्रों वाले स्कूल और ग्राम पंचायत में एकमात्र स्कूल को मर्जर से बाहर रखा जा सकता है।

4. दूरी का नियम क्या है?
स्कूल बस्ती से 1 किमी के दायरे में होना चाहिए।

5. अगर मर्जर में गड़बड़ी हो तो क्या होगा?
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी त्रुटियों की जांच कर सुधार करेंगे।

6. संसाधनों की कमी का क्या?
मर्ज किए गए स्कूलों में कक्ष, शौचालय जैसे संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश हैं।


डिस्क्लेमर:
यह लेख उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। नीति से संबंधित नवीनतम अपडेट या बदलाव के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें। यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है और इसमें परिवर्तन संभव हैं। किसी भी नीतिगत निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here